मंगलवार, मार्च 09, 2010

जाको राखे साईयां,

आठ मार्च २०१० का बड़ी बेसब्री से इंतज़ार था| कुछ कुछ वैसा ही माहौल बन रहा था जैसे स्काई लैब के गिरने से पहले था| कब गिरेगा, कहाँ गिरेगा, कैसे गिरेगा और कैसा गिरेगा| हम तो जी रात में भी हेलमेट पहन कर सोते थे कि जितना सावधान रहा जा सके, रहना चाहिए| सारी सावधानियां धरी की धरी रह गयीं, और वो ससुरकनाती पता नहीं कौन से महासागर में जा गिरा| अब इसमें छुपाने की कोई बात है नहीं कि हमारी हिस्ट्री जितनी खराब रही है, भूगोल उससे भी ज्यादा खराब था और अब और भी ज्यादा खराब होता जा रहा है, ३६-३८-४० तो होगा ही हमारा जीरो फिगर| सिक्स पैक या एट पैक ऐब तो जी बड़े लोगों के चोंचले हैं, यहाँ तो बिना एक भी ऐब के भी दाल रोटी महंगी लग रही है, कहाँ से बन्दा छे-आठ ऐब पाल ले|
खैर हमें इंतज़ार था महिला आरक्षण बिल के पास होने का| आज सवेरे से अपनी स्त्री शक्ति को कई बार बिना बात के सैलयूट कर दिया कि हो सकता है कल को कुछ आड़े-टेड़े समय में काम आ जाए, पर वो भी दो-तीन दिन से ब्लॉग जगत की हलचलों से वाकिफ थी तो हमारा बायकाट किये रही| कई बार हम धमकाए जा चुके हैं कि हमें अकेली मत समझना, नारी क्रान्ति हो चुकी है| हमारी एक आवाज पर एक से बढ़कर एक वीरांगना झंडा-डंडा उठाकर हमारे सुर में सुर मिलाने आ जायेंगी| नारियां सभी एक पार्टी में है ही, नर दोनों तरफ बंटे हुए हैं और बहुत से तो पाला बदलकर नारी शक्ति का आधिपत्य स्वीकार कर चुके हैं| जो थोड़े से विरोध कर रहे हैं, वो भी झक मार के इस पाले में आ ही जायेंगे| मूढ़ नरों, अपनी खैर मनाओ और समर्पण कर दो| ब्लॉग दुनिया के बच्चों को बड़ा नहीं होने दिया जाएगा, बड़ों को झुका लिया जाएगा और जो नहीं मानेंगे उन्हें आठ मार्च २०१० के बाद देख लिया जाएगा| जब आरक्षण मिल जाएगा फिर देखेंगी हम तुम जैसे ख्वामख्वाह को| अब जी, हम तो धमकियां खाने में १५ साल के अनुभवी हैं, फट से धमक लिए| बहस करने में पता नहीं क्या-क्या खिताब मिल जाएँ| जो पहले पा चुके, उसी में सब्र करके रूखी=सूखी खाए के ठंडा पानी पी लिए| बाकी समर्पण वाले मुद्दे पर हम भी क्रांतिकारियों से कुछ कम नहीं है, 'पंचायत दा आख्या सर मत्थे, पर परनाला उथे दा उथे|'
आज आफिस से घर ऐसे ही लौटे, जैसे गाय कसाईखाने की तरफ| बार बार प्राण साहब की तरह गर्दन पे हाथ फेर रहे थे कि कब तक बचेगी| घर आने के बाद पता चला कि साईकिल वाले नेताजी और लालटेन वाले नेताजी-कम अभिनेताजी-ज्यादा और उनके साथियों ने एक बार फिर महिला आरक्षण बिल पास नहीं होने दिया| चलो, अपने घर में तो एक बार फिर हम गर्दन सीधी कर लेंगे, 'जाको राखे साईयां, मार सके न कोई।

अब इन मान्यवरों से यह पूछने का मन कर आया कि जिस आरक्षण का सहारा लेकर अपनी राजनीति करते रहे, वही आरक्षण आपके विरोध का पात्र कैसे हो गया? दाखिले में आरक्षण, नौकरी में आरक्षण, प्रोमोशन में आरक्षण, जिन्हें आरक्षण का लाभ एक बार नहीं अनेक बार मिल गया उनके परिवार के लिए आरक्षण, सरकारी विभागों में प्रोमोशन के समय आरक्षित वर्ग के सदस्यों के स्पेशल ट्रेनिंग कार्यक्रम जायज है तो महिलाओं को चुनाव में आरक्षण का लाभ देने में कौन सी दुनिया पलट जायेगी? इनका आरोप है कि परकटी महिलायें इस सुविधा का दुरूपयोग कर जायेंगी तो कृपया ये बताएं कि जातिगत आरक्षण की मलाई क्या चुनिन्दा जातियां और उनमें भी चुनिन्दा परिवार नहीं खा रहे हैं? किसी प्रतियोगिता के लिए योग्यता एकमात्र मापदंड होना चाहिए| जरूरतमंदों को मुफ्त व स्तरीय शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए| मुफ्त पठन सामग्री, कोचिंग आदि उपलब्ध कराये जाने चाहियें और सरकार सभी के लिए ऐसा नहीं कर सकती तो आय का पैमाना ही सर्वाधिक उपयुक्त लगता है| महिला आरक्षण पर आपकी नीयत साफ़ मानी जाती यदि आप भी अपने और अपनों के फायदे के लिए आरक्षण का बायकाट कर देते| आपको चाहिए कि अपने सार्थक सुझाव देकर इस बिल को अधिक प्रभावशाली बनाने में सहयोग देते ताकि देश का भला हो सके|
लो जी होर सुनो: आज लुधिआना में सड़क पर एक छोटा सा, नन्हा सा तिपहिया ट्रांसपोर्ट कैरीअर देखा जिसके पीछे लिखा था "मैं वड्डा होके ट्रक बनांगा" - बल्ले ओये तेरे होंसले, मजा आ गया(मुझे तो), कसम से|

9 टिप्‍पणियां:

  1. ओ जी टेम्पो महराज...
    अगर मुझे कुछ हो गया न तो सच्ची मैं घर में बता देती हूँ कि आपको ही पकड़ा जाए...बुढ़ापा है कभी सांस भी उखड जावे....
    हंस-हंस के मेरा मुंह ही खुला रह गया....हाँ नहीं तो ...!!!

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  2. बहुत ही जबरदस्त व्यंग, मजा आगया.

    रामराम.

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  3. बहुत बढ़िया लिखते हैं आप , सैल्यूट कर लिया आपने , ये बहुत बढ़िया काम किया , नहीं तो आना तो वहीं था ।

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  4. अब इन मान्यवरों से यह पूछने का मन कर आया कि जिस आरक्षण का सहारा लेकर अपनी राजनीति करते रहे, वही आरक्षण आपके विरोध का पात्र कैसे हो गया?
    ...बढियां.
    लीजिए.. दूसरे दिन ही सही...पप्पू पास हो गया.

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  5. संजय जी, बेहतरीन पोस्ट है.
    अब सायकिल के हैंडल पर लालटेन टांगकर दोनों डबल सवारी करेंगे. कादर खान और शक्ति कपूर के जैसी जोड़ी लगेगी.

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  6. @अदा जी
    त्वाडे ते तां मानहानि दा मुकदमा करांगा कनाडे आके, ट्रक नूं टेम्पो कहंदे ओ, बाकी रही पकड़न दी गल ते जी असी हमेशा तैयार रहंदे आं पकडे जान लई|
    आभार|

    @ताऊ जी
    थम राजी तो हम राजी| .
    रामराम|

    @मिथिलेश जी
    छोटे भाई, सीख ले सेलयूट लगाने, काम आयेंगे|

    @देवेन्द्र जी
    पधारने का और उत्साह बढ़ाने का धन्यवाद,
    पप्पू का पास होना जरूरी था, व्यवस्था की तो देखी जायेगी|

    @शिव कुमार मिश्र जी
    दादा, पधारने का धन्यवाद और उत्साहवर्धन के लिए आपका आभारी रहूँगा| हम तो आपके लेखन के पहले से ही फैन, कूलर, ऐसी -डीसी वगैरह हैं| अब तो हमें कुछ गुमान सा होने लगा है कि हम पता नहीं क्या है| पुनः आपका आभार व्यक्त करता हूं|

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  7. बहुत बढिया पोस्ट...हास्य और व्यंग्य दोनों की अच्छी डोज दी आपने!
    वैसे बादशाहो, जे कुछ बणन दा इरादा ही ए ते फेर ट्राले बनो...ट्रक च की रख्या जे :-)

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  8. @ पं.वत्स जी
    __________

    पंडित जी, शुक्रिया। इरादा पूरा है जी, वेखो कदों पूरा हुंदा है। धनवाद।

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  9. बहुत बढ़िया, सामयिक चर्चा रही आपकी ! देश की जानता को इनके बारे में समझाना अभी बाकी है फिर काम हो जाएगा !
    शुभकामनायें आपको !

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