बुधवार, अगस्त 07, 2013

येस मिनिस्टर


गधे हैं जो रक्षामंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके व्यक्तव्य का   विरोध कर रहे हैं। अब भला इन गधों से कोई पूछे कि जो जानकारी किसी मंत्री के पास हो सकती है, वो आम जनता को कैसे हो सकती है? बिना पाकिस्तान की स्वीकारोक्ति के ऐसे कैसे उनके उजले कपड़ों पर कीचड़ उछाल देते?   स्टुपिड पब्लिक, इस बात का शुक्र नहीं मनाती कि अभी उन्होंने ये नहीं कहा कि इस घटना के पीछे भगवा आतंकवादी है।

अवसर को देखते हुये कड़ी  निंदा, भर्त्सना, घनघोर आलोचनायें होंगी। पड़ौसी देश के साथ सख्ती से निबटने के भाषण होंगे। जनता को धैर्य व संयम रखने की अपीलें होंगी। 

शोर शराबा हो रहा है तो फ़ौजियों के परिवार वालों को भी कुछ पैकेज-वैकेज दे दिया जायेगा। अरे भई, फ़ौज में नौकरी करने गये थे तो जान जाने का रिस्क तो रहना ही था। वैसे भी शायर ने कहा है कि ’ये जान तो आनी-जानी है, इस जान की कोई बात नहीं’ 

दो-तीन महीने के बाद इस बात पर संतोष ही नहीं जताया जायेगा बल्कि अपनी पीठ ठोकी जायेगी कि शांति-प्रक्रिया में गतिरोध समाप्त कर लिया गया है।

Very well said Sir, keep it up. We deserve all this and much more.

27 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. भारत के रक्षा मंत्री ने बस इतना ही तो बयान दिया 'हमलावर आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहनकर आए थे।' और आप सोच में पड़ गए.. आपको तो खुश होना चाहिए, हमारे देश के रक्षा मंत्री इतने सचेत हैं कि पाकिस्तानी आर्मी की वर्दियों तक का हिसाब रखते हैं..कौन उनको पहन रहा है, और कौन उनका सदुपयोग कर रहा है, वो ये तक बता सकते हैं, वेरी अलर्ट अंटोनी :(
      आप भूलते हैं, एक तो ये अंटोनी हैं ऊपर से इटली का बोझ है.। क्या करेगा बेचारा ! बहुत जल्द लोक सभा में बयान आने वाला है, भगवा आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहनकर आये थे :(
      गरीब की जान गयी तो जाने दीजिये, जान वैसे भी जाने के लिए ही होती है.। महत्वपूर्ण बात ये है कि लोक सभा, राज्य सभा में बहस का एक मुद्दा मिल गया है, दो मिनट के मौन के लिए भी किसी के पास फुर्सत कहाँ है भला, इतने तो बीजी हैं लोग :(

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  2. डायरेक्टर होर्टीकल्चर का
    पानी लगा रहा पौधों में !
    जिले के एसपी को भेजा है
    बच्चों को, स्कूल से लाने !
    सुबह से दरवाजे पर बैठे,हाथ में लेकर बैग,कलक्टर !
    चरणधूल माथे पर लेकर,तब अपने को कहें कलक्टर !

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  3. इतनी सी बात के लिए इतना बडा हंगामा !

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  4. हमें एक बड़े देश के रूप में सोचने में भी लज्जा होने लगी है। इससे अच्छा तो दिल्ली के बराबर का इज़रायल है, अकेले दम सबको धमका रहता है।

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  5. बड़े- बड़े शहरों में छोटी- छोटी बातें होती रहती हैं.… बस बातें- बातें- बातें :(

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  6. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (08-08-2013) को "ब्लॉग प्रसारण- 79" पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  7. no we dont deserve it but we are made to sollow it one day when we all will vomit they will understand not before that

    my condolence is with the families

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  8. बहुत ही सटीक कहा आपने.

    रामराम.

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  9. ये तो होने ही वाला था , जैसे ही शरीफ जी ने सराफत दिखाई थी उसी समय लगा की कुछ होने वाला है , हा इतनी जल्दी होगी इसकी उम्मीद नहीं थी , क्योकि शरीफ जो कह रहे है यदि उस तरफ एक कदम भी बढ़ाया यानि रक्षा बजट में कटौती तो वहा कईयों के पेट पर और उनके होने उनके वजूद पर ही लात होगी , पेट पर लात कौन बर्दास्त करता है सो ये तो होना ही था | उन पर दोषारोपण काहे का जब हमारे देश की सेना और रक्षा मंत्री दो अलग विचार रखते है किसी एक हमले पर , तो वहा भी ऐसा ही हो सकता है हमला करने पर | जब पडोसी सेना ऐसी हो तो आप को सोते हुए भी जागते रहना चाहिए , आप इसके सिवा और कुछ भी कर नहीं सकते है :(

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  10. यथार्थ व्यक्त किया आपने…………

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  11. पाक आर्मी का वश चले तो इस बात के लिए इन महोदय को "निशान ए पाक" दिलवा दे ।

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  12. बिलकुल सही बात है, मरते है मरने दो, इनकी जान तो सुरक्षित है

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  13. संजय भाई साहब आपने सारगर्भित तरीके से वर्तमान, भूत और भविष्य का चित्रण कर दिया अब हमारे जैसा ज्ञानी उसे न समझ पाए तो क्या करियेगा सटीक और पैना लेख क्या बधाई कहूँ इस हत्या पर

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  14. संजय भईइया! क़ाफ़ी समय हुया,बस यूँ ही सोचा चलो ,’नमस्तें’ बोल आयें!
    नमस्ते!

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    1. नमस्ते भगवन! सप्ताह भर बाद आज ही लौटना हुआ है तो हमारी प्रतिनमस्ते एक सप्ताह लेट ही सही:)
      ये तो हुई जवाबी नमस्ते, असली वाली तो वहीं होगी ’सच में’ :)

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  15. हां जी बताओ तो जरा...ये भी कोई बात हुई ...लगता है किसी के पास कोई काम नहीं है जो प्रदर्शन करने चल देते हैं....बताइए भारत जैसे देश के लिए गर्व की बात है कि नहीं कि प्रधानमंत्री औऱ रक्षामंत्री पर आजतक भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लग पाया है..बताइए ऐसे शरीफों के खिलाफ भी प्रदर्शन होते हैं हां नहीं तो

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  16. संजय जी , सही है ... एक दम जबर्दश्त ..

    दिल से बधाई स्वीकार करे.

    विजय कुमार
    मेरे कहानी का ब्लॉग है : storiesbyvijay.blogspot.com

    मेरी कविताओ का ब्लॉग है : poemsofvijay.blogspot.com

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  17. time up हो चला है अब अपना।

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  18. राजनैतिक स्थिरता होते हुए भी अस्थिरता है.. तो यह सब झेलना ही पड़ेगा.. विदेश मंत्री बदलती ही.. विशेष लोग मंत्रालय में पदस्थ हो जायें तो क्या सोचना चाहिये..

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  19. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ ( 6 अगस्त से 10 अगस्त, 2013 तक) में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

    कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

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