मो सम कौन कुटिल खल कामी.. ?
रविवार, मई 30, 2010
रोशनी और मनमोहनी जी.डी.पी.
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जब मैं छोटा बच्चा था, बड़ी शरारत करता था, मेरी चोरी पकड़ी जाती, जब रोशन होता बजाज। ये विज्ञापन तो सबको याद होगा ही, नहीं क्या? ...
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शुक्रवार, मई 28, 2010
झेलो अब फ़िर से, नहीं मानते तो...........
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डिस्क्लेमर:- अगर ये सोच कर इधर पधार रहे हैं कि कोई बड़ी साहित्यिक रचना पढ़ने को मिलेगी, तो हुज़ूर हमें बस यही कहना है कि ’हमारे भरोसे न रहन...
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रविवार, मई 23, 2010
नहीं झिले न हम छ महीने भी?
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मेरे कम्प्यूटर पर कल से ब्लॉगस्पॉट पर कोई भी ब्लॉग नहीं खुल पा रहा है। सिर्फ़ cached copy खुलती हैं, वो भी कभी हां और कभी न। जबकि वर्डप्र...
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सोमवार, मई 17, 2010
भेड़ का जबरन बाल उतरवाना............!
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“हमेशा की तरह एक ठो सवाल दिमाग में आ गया सो कहते हैं (पूछने की हिमाकत ब्लॉग जगत में, वह भी अल्ल सुबह!, कौन करे?) प्यार में सताए/हुटकाए पुरु...
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