मो सम कौन कुटिल खल कामी.. ?
मंगलवार, अप्रैल 26, 2011
हम चिल्ल हो चुके सनम(some lighter moments)...
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पिछले बहुत समय से कोई फ़िल्म नहीं देखी। एक तो टिकट बहुत महंगी है, अकेले जायें तो परिवार वालों के साथ अन्याय लगता है और बारात साथ लेकर जा...
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बुधवार, अप्रैल 20, 2011
शिकार - एक लघुकथा
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(चित्र flickr.com से साभार) ...
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बुधवार, अप्रैल 13, 2011
काश कभी यूँ भी हो.... A monologue
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मैंने कभी दो दिन भी बालों में तेल नहीं लगाया तो कितना गुस्सा आता था तुम्हें? मैं छेड़ता था तुम्हें जानबूझकर कि मुझे अपने चिपचिपे बाल नहीं ...
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शनिवार, अप्रैल 09, 2011
ऑफ़िस-ऑफ़िस
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बैंक की वार्षिक लेखाबंदी, पेंशन वितरण, ऑडिट आदि आदि के चलते मुश्किल से दो दिन की छुट्टी का जुगाड़ हो पाया था। सोमवार को ड्यूटी करके रात भर...
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