मो सम कौन कुटिल खल कामी.. ?

गुरुवार, अक्टूबर 23, 2014

दीपोत्सव

›
महापर्व के दिन हैं तो पिछले दो तीन दिन से  लौटते समय मेट्रो में बहुत भीड़ हो जाती थी। ’नानक दुखिया सब संसार, सारे दुखिया जमनापार’ के रिमिक्...
17 टिप्‍पणियां:
रविवार, अगस्त 03, 2014

एक गुंडे का कैरेक्टर सर्टिफ़िकेट

›
मोबाईल में अब भी वही गाना बज रहा था ’अपने लिये जिये तो क्या जिये,  तू जी ऐ दिल ज़माने के लिये’ और वो साथ साथ गुनगुना रहा था। मेट्रो स्टे...
25 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, जुलाई 01, 2014

झाड़ू-नमक

›
मेरे बाँये पैर के अंगूठे के ठीक ऊपर एक मस्सा था जो जन्म से नहीं था बल्कि मेरे कुछ बड़े हो जाने के बाद हुआ था। हालाँकि वो मस्सा आकार में चने...
21 टिप्‍पणियां:
रविवार, जून 15, 2014

होर वड़ो..

›
’लाला’ एक ऐसा शब्द है जो कभी किसी जाति का सूचक बन जाता है, कभी किसी व्यवसाय का। पंजाब की तरफ़ हिन्दु परिवारों में घर के मुखिया को लाला कहकर...
17 टिप्‍पणियां:
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें
मेरी फ़ोटो
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
Blogger द्वारा संचालित.