बुधवार, मार्च 31, 2010

एक स्कीम आजमायें?

लो जी बादशाहों, फिर आ गए हम आपको सताने के वास्ते, खिझाने के वास्ते| ये हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इस से हमें कोई वंचित नहीं कर सकता| जितना हमें इस दुनिया ने सताया है, खिझाया है और रुलाया है, सारा हिसाब बराबर करके ही जायेंगे| साथ लेकर जा सकते होते तो और भी बहुत सी चीजें हैं, वही ना ले जाते| जो कुछ भी हमारे साथ घटा है, अब औरों को भी झेलना पड़ेगा| तैयार हो जाओ दुनिया वालों, हम किसी के रोके से रुकने वाले नहीं है| बन्दर के हाथ में उस्तरा(थी तो तलवार लेकिन अब उस्तरा रह गयी है) अभी बाकी है|
इस दुनिया में हमारा आगमन अभी तीन चार महीने पहले ही हुआ है| यहाँ आने से पहले हमें इस भौतिक जगत में हमीं अकेले समझदार लगते थे, वो तो यहाँ आये तो आँखें खुलीं| अब औरों ने भी हमें समझदार मानना शुरू कर दिया है, पहले अकेले हम ही थे जो ऐसा सोचते थे| खैर देर आयद, दुरस्त आयद| अच्छा किया कि मान गए यार लोग प्यार से, नहीं तो हम पका पका कर मनवाने की कला भी जानते हैं| वैसे अगर अपने बस में होता तो हम कभी भी समझदार न बनते, पर ये दुनिया बहुत जालिम है, नहीं मानी और बना दिया हमें समझदार| तो जी हमारा इरादा है, उन सभी को बदनाम करने का, जो हमारी बर्बादी के कारण हैं| लेकिन, इतने समझदार हम हैं कि पहले ही सब पर इल्जाम धरने शुरू कर देंगे तो कोई भी कह देगा कि ये तो मिथ्यारोप लगा रहे हैं, इसीलिये पहले थोड़ी सी तारीफ़, खुशामद, स्तुति, प्रशंसा सीधे से कहें तो मस्का मार लेते हैं ताकि माहौल सही बन जाए| फिर पलटी मार लेंगे और सब को एक तरफ से लताड़ना शुरू कर देंगे| बीच में जब जरूरत महसूस होगी, कर लेंगे परिवर्तन| ह्रदय परिवर्तन, छवि परिवर्तन, विचारधारा परिवर्तन या कुछ भी, कईयों को देख लिया इस छोटी सी जिन्दगी में| हाँ, धर्म परिवर्तन भी कर सकते हैं अगर पैकेज आकर्षित मिले तो| धर्म की श्रेष्ठता और सर्वश्रेष्ठता हमारे लिए कोई मायने नहीं रखती है, हमारी समझ में तो सारे धर्म महान हैं और उनके मानने वाले भी| बस ये थोपा-थापी जमात है कि 'मेरी कमीज तुम्हारी कमीज से ज्यादा सफ़ेद है' राग अलापती रहती है| और ये हमें ऑफर किया जाने वाला पैकेज इंस्टैंट होना चाहिए, ये नहीं कि मरने के बाद वो सारे काम करने को मिलेंगे जो आज खुले-आम करना चाहें तो गालियाँ मिलेंगी, इसीलिये छुपकर करने पड़ते हैं| कल्लेंगे धर्म परिवर्तन और कह देंगे कि मेरी आँखें खुल गईं हैं| इतना पक्का है कि समर्थक हमें भी मिल जायेंगे सूली पर चढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए, और हमारा स्वभाव है भी इतना नरम कि फट से प्रेरित हो जाते हैं| और कोई ना मिले तो तीन चार अपने प्रोफाईल बनाकर टिप्पणी, प्रति टिप्पणी कर कर के एक्शन, रिएक्शन वाली चैन रिएक्शन बना देंगे| जब तक उधर का माल किनारे लगेगा, कोई ना कोई और ऑफर आ ही जायगा| आखिर तो हर धर्म को हमारी जरूरत है, हमें थोड़े ही धर्म की जरूरत है| किसी दूसरे पाले में जाना पडा तो फिर कह देंगे कि भाई अब सच में आँखें खुल गईं हैं| सारों को खुश कर देना है जी, चक्कर काटकर वापिस यहीं आ जायेंगे, कह देंगे कि हो गयी 'घर वापिसी'| है क्या किसी माई के लाल को शक हमारी समझदारी पर? क्या यार, मेरे साथ ऐसा क्यों होता है कि जाना होता है जापान और पहुँच जाता हूँ चीन? अब देखो ना, चले थे दूसरों की प्रशंसा और आलोचना करने, स्कीम अपनी बता दी| अब ये काम फ़िर करना पड़ेगा कभी। करवानी ही पड़ेगी फोर्मेटिंग दिमाग की| तो सानिया, सचमुच जा रही हो? बधाई अभी दे दें क्या? हमारे बारे में सोचकर दुखी मत होना, हमें तो आदत हो चुकी है और फिर पाकिस्तान कौन सा पराया है, अपना छोटा भाई ही है| अरे भैया कोई बता दो ये दिमाग की फोर्मेटिंग तसल्लीबख्श तरीके से कहाँ से हो सकती है?
अब बाकी दी गल्लां छड्डो ते गाना सुनो, लेकिन सनद रहे(डिस्क्लेमर:- इस गाने का ऊपर लिखी बकवास से कोई सम्बन्ध नहीं है, नहीं है और बिल्कुल नहीं है)

11 टिप्‍पणियां:

  1. हा हा हा ..
    अच्छा व्यंग लिखते हैं आप
    'दिमाग की फार्मेटिंग' !!
    काश ये होता ..:)
    इस गीत को बहुत ही सालों के बाद सुना ...बहुत सुन्दर..

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  2. मिस्‍टर एण्‍ड मिसेज मलिक गा रहे हैं क्‍या?

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  3. तुम यूँ ही सताते रहो, हम तड़पते रहें,
    तो मजा जीने का और भी आता है.

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  4. "अरे भैया कोई बता दो ये दिमाग की फोर्मेटिंग तसल्लीबख्श तरीके से कहाँ से हो सकती है?"

    शादी शुदा है, जनाव ? यदि नहीं तो जबाव फटाफट कर डालिए, ब्रेन वाश का सॉफ्टवेर साथ में मिलता है :)

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  5. आजकल यहाँ ब्लागजगत में ही कोई दिमागी डाक्टर आए हुए हैं...शायद कोई जलील वलील सा नाम है उनका.सुना है बहुत पहुँचे हुए डाक्टर हैं, बडी शफा है उनके हाथ में। एक दो बार तो खुद का इलाज भी कर चुके हैं...जरा एकबार उनसे मिल लीजिए..क्या पता ये मामला फार्मेटिंग वाला न होकर के उनके वाला हो :-)

    चलिए इस लाजवाब व्यंग्य के लिए आपको धन्यवाद तो दे ही देते हैं..कबूल कीजिएगा :-)

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  6. @अदा
    अदा जी, सच में ये नहीं होता क्या? क्रैश होकर ही मानेगा फ़िर तो!
    आपको पसंद आया, हम धन्य हुये।

    @Udan Tashtari
    समीर साहब, आपका शुक्रिया।

    @Dr.Smt.ajit gupta
    खुश रहें जी आबाद रहें, यहां रहें या फ़ैसलाबाद रहें|(हमारी तो जैसे तैसे कट जायेगी)
    डा. साहिबा, पधारने का धन्यवाद।

    @ताऊ रामपुरिया
    ठीक सै ताऊ, थम भी ले ल्यो आनंद।
    रामराम।
    @VICHAAR SHOONYA
    अच्छा जी, आप भी?
    धन्यवाद

    @पी.सी.गोदियाल
    गोदियाल साहब, एक बार तो हो चुके, अब पैकेज आया तो देखेंगे।
    आपका आना अच्छा लगा।

    @dhiru singh(धीरू सिंह)
    भूलने वाली बात है भी नहीं, भाई जी।
    धन्यवाद।

    @पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
    आपके बताये नाम से ही डा. साहब की पहुंच मालूम चल गई। मिल तो लें जी उनसे पर सोचते हैं कि पहले अपने आप को, अपने धर्म को जान लें फ़िर दूसरों को उपदेश देने जायेंगे। और महाराज आप कबूल करने की बात करते हो, सर-माथे पर लेते हैं आपको।
    धन्यवाद।

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  7. गुरु,
    मैं ना भूलूंगा इन अनमोल वचनों को...

    जय हिंद...

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  8. @खुशदीप सहगल:-
    ------------
    खुशदीप सर, शर्मिंदा न करें, वैसे भी मेरा हाजमा कमजोर है।
    कमेंट करने ले लिये आभार।

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