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रविवार, अगस्त 19, 2012

किस्सा\किस्से

ऑफिस से स्वतंत्रता दिवस के बाद दो दिन का अवकाश ले रखा था, कुछ जरूरी काम थे|  ये ऐंवे ही  आपको बता रहा हूँ, कहीं इसे प्रार्थी का निवेदन   न समझ लीजियेगा :-)          हुआ ये कि गैस एजेंसी का एक स्टाफ कुछ दिन पहले  KYC compliance    (Know Your Customer कम्प्लायेंस )  का  एक  फ़ार्म दे गया था मय एक मीठी  सी  चेतावनी,  कि इसके  जमा न करने पर कंपनी की तरफ से गैस सप्लाई बंद करने के आदेश हैं| अब हम ठहरे महासुस्त आदमी, ये सोचा कि अगली सप्लाई न देंगे इस डर से अपनी  इस मानव  देह जिसे पाने के लिय देवता भी वोटिंग लिस्ट में रहते हैं, को क्यों परेशान किया जाए?  जो सिलेंडर इस्तेमाल में है, उसे थोड़े ही न उखाड कर ले जायेंगे कंपनी वाले? तो उस फ़ार्म को  'रेफर टू  ड्राअर' करके सुस्ताते रहे|  यूं भी बैंकर होने के नाते KYC अपनी जानी पहचानी चीज थी  और जानियों पह्चानियों चीजों  को हम हल्के-फुल्के तरीके से नहीं लेते, हैंडल विद केयर करने की कोशिश करते हैं|    इस तरह के दो तीन काम इकट्ठे हो गए तो फिर पाला बदलकर सोचने लगे कि कंपनी ने सचमुच सप्लाई रोक दी तो रोटी के लाले इस मानव देह को ही पड़ने हैं, देवताओं का कुछ आना जाना नहीं है| हमने अवकाश लेकर गैस एजेंसी जाने का निर्णय कर  लिया|

कागज़ पत्तर इकट्ठे करके जब जाने लगा तो देखा माताश्री अन्य सब्जियों  के साथ साथ करेलों का भी  कलेजा काटने को तत्पर हैं| अब करेला उन चुनिन्दा कड़वी चीजों में से एक हैं, जिन्हें देखकर हमारे मुंह में पानी  आ जाता है और मेरे घर में सिर्फ मैं ही हूँ जो करेला बड़े शौक से खाता हूँ|  समझ गया कि हमारी छुट्टी को स्पेशल बनाने का यह  माताश्री की तरफ से प्रयास है| कहने लगीं, "देख ज़रा, कितना वजन होगा इनका अंदाजे से?"   मैंने पूछा, " क्या हुआ?"   कहने लगीं, "दस रुपये के ढाई सौ ग्राम  बता रहा था, लेकिन वजन कम लग रहा है| उस समय तो सारी सब्जियां  उसने एक ही थैली में डाल दीं,  ये ढाई सौ  ग्राम तो नहीं लगते|" अपन तो फुर्सत में थे ही, दुकान से वजन करवाया, निकले 180 ग्राम| माताजी सब्जीवाले को लक्ष्य करके बार बार यही कह रही हैं, "पन्द्रह रुपये के ढाई सौ ग्राम देता, लेकिन तौल तो सही रखना चाहिए था|" सब्जीवाला तो कब का जा चुका था, मैं सुन रहा था बल्कि मैं भी कहाँ सुन रहा था? मैं तो हिसाब लगा रहा था -
a. 28% की हेराफेरी 
b. वजन के हिसाब से देखें तो सिर्फ 70 ग्राम की ठगी
c. रुपयों में गिने तो कुल दो रुपये अस्सी पैसे की हेराफेरी
d. करने वाला गरीब आदमी 
e. हम ही कौन सा बहुत ईमानदार हैं. 

कौन सा विकल्प सबसे सही है
a/b/c/d/e/none of these/all of these ?

गैस एजेंसी पहुंचा और काऊंटर पर फ़ार्म जमा कर रहा था कि ग्राहकों की भीड़ को जल्दी निबटाने के लिए वहाँ के मैनेजर\मालिक काऊंटर पर आये और कुछ कस्टमर्स को अपने साथ ले गए|  उन्होंने KYC वाला  फ़ार्म ले लिया तो मैंने उनसे कहा कि मैंने नैट पर चैक किया है कि मेरे नाम पर DBC कनेक्शन जारी दिखाया जा रहा है|  मैं आपकी एजेंसी की तत्परता, ग्राहक सेवा वगैरह का शुक्रगुजार होना चाहता हूँ, आजतक से भी तेज, सबसे तेज| मेरे मन में अभी ये DBC वाला विचार आया ही था और आपने उसे  इम्प्लीमेंट   भी कर दिया, 'वाह  ताज|' बस मुझे वो कागज़ देखने हैं कि कब मुझे DBC अलोट हुई थी?"   शुरू में तो मालिक साहब ने इसका श्रेय मुझे ही दिया कि मैंने अप्लाई किया होगा और सिलेंडर लिया होगा, तभी रिकार्ड DBC दिखा रहा है  या फिर ये कि आपका एकाऊंट तो कहीं और से ट्रांसफर होकर आया होगा, वगैरह वगैरह वरना उनके एजेंसी इतने भी तेज नहीं है| लेकिन फिर धीरे धीरे धरती पर लैंड कर गए कि भाई साहब, आज  शुक्रवार है और अलविदा की  नमाज है| माहौल थोड़ा ठीक नहीं है, इसीलिये मैं आधे कस्टमर्स को खुद अटेंड कर रहा हूँ| मुझे थोड़ा सा वक्त दीजिए,  हम फिर किसी दिन  बैठकर बात कर लेंगे|" जिस दिन जाऊंगा, यकीन है कि बात हो जायेगी और मुझे सिलेंडर मिल जाएगा| लेकिन  मेरे साथ या औरों के साथ जो हो चुका या होता रहता ........................ विकल्प दूं फिर से ?

अभी आज की ही बात है, बाईक में पेट्रोल डलवाना था| एक पम्प पर दो अटेंडेंट आपस में बातों में मस्त थे लेकिन इशारा करके मुझे बुला लिया| दो सौ रुपये का पेट्रोल डलवाना था, मेरे बताने के बाद उन्होंने टंकी में पाईप रख दिया और फिर मीटर में अमाऊंट सेट करने लगा,  बल्कि  ज्यादा देर लगाकर और  ख्वामख्वाह की झल्लाहट दिखाते हुए अपसेट करने लगा|   अब बातों में मुझे भी शामिल करने लगे, 'सर ये दस दस के नोट दीजियेगा न, हमारे काम आ जायेंगे|'  बिना मतलब की बेसिरपैर की बातें,  और उसके बाद उनमें से पहला  दूसरे से पूछने लगा, 'मशीन कितने पर रुकी थी, पचास पर?'  दूसरे  ने हामी भरी, 'हाँ, पचास पर रुक गई थी|  अब डेढ़ सौ का और डाल  दे|'  पचास रुपये का चूना?  माँगा था पेट्रोल, लगाते  चूना:)   लेकिन बंदे थे बड़े शरीफ cum ईमानदार,  जल्दी ही पटरी पर आ गए|  पहली ही घुडकी के बाद  हामी भरने वाला प्रश्वाचक मुद्रा में आ गया, 'अच्छा, मशीन चली ही नहीं थी?'  पूछने वाला डांटक मुद्रा में आ गया उस पर, 'तूने अच्छे से  देखा नहीं था फिर बोलता क्यूं है?'   कल्लो बात, हमने तो जैसे  ऐसी नूरा कुश्ती कभी देखी ही न  हो|  हाँ तो, दो सौ रुपये में से पचास रुपये का कितना प्रतिशत बैठा जी?   विकल्प..........

कुछ साल पहले एक परिचित के यहाँ कुछ पार्टी शार्टी थी| मित्र का एक रिश्तेदार भी आया हुआ था, किसी सरकारी पशु चिकित्सालय में कार्यरत था| उसी की ज़ुबानी उसका किस्सा सुन लीजिए, "नौकरी करते हुए साल भर ही हुआ था कि मैं भयंकर रूप से  बीमार हो गया| दो महीने तक ड्यूटी पर नहीं जा सका| फिर एक दिन थोड़ी तबियत ठीक थी तो चला गया|  स्टाफ के सब लोगों से मिला, उन्होंने अलमारी में से वेतन  रजिस्टर निकाला, रसीदी टिकट पर मेरे साइन करवाए और मुझे पैसे पकड़ा दिए| जब मैंने पूछा कि ये क्या है, कितने हैं तो बताया गया कि दो महीने की तनख्वाह है| मैं अकड़ गया कि ये तो मेरी तनख्वाह है ही, मेरा हिस्सा किधर है?  हिस्सा देने पर  स्टाफ के लोग  नहीं  मान रहे थे तो  मैंने कहा कि ठीक है फिर,  कल से मैं रोज आऊँगा|   सबको सांप सूंघ गया हो जैसे, आपस में सलाह मशविरा करके मुझे हजार रुपये और दिए और समझाने लगे कि मैं अपनी तबियत का ध्यान रखूँ, सरकारी काम तो यूं  ही चलते रहेंगे| तब से मैंने अपनी तबीयत का ध्यान रखना शुरू कर दिया, महीने बाद जाता  हूँ, तनख्वाह और पांच सौ रुपये लेकर उसी में से दो-तीन  सौ रुपये की उनकी पार्टी कर देता हूँ, वो  भी खुश और मेरा भी काम चल रहा है| महीने में एकाध कोई प्रोपर्टी का सौदा करवा देते हैं  और यूं ही बस गुजारा चल रहा है|

पहले तीन वाकये पिछले तीन दिन के हैं वो भी खुद के साथ घटित, औसतन एक दिन में एक किस्सा| इसका एक मतलब ये भी निकलता है कि क्या  this international phenomenon i.e. corruption समाज की रग-रग में इस तरह पैबस्त हो चुका है कि अब ये सब खलता नहीं है?  सबके पास अपने तर्क हैं, कोई गरीबी ज्यादा बताता है तो कोई महंगाई ज्यादा बताता है|  मेरा मुंह तो पेट्रोल पम्प वाले ने सिर्फ एक बात से बंद कर दिया, 'सरजी, हमें पचास रुपये की गलती पर आप गाली निकाल दोगे लेकिन वो कोयले वाला घोटाला हुआ है उसमें जीरो कितनी लगेंगे, ये बताओ तब जानें आपको|'  जा यार, मुझे तो कसम से एक लाख की जीरो  नहीं  मालूम  और तू पूछ रहा है 1.86 लाख करोड़ की जीरो का? not my rake of coal :)

जुटे रहो भाई आम-ओ-खास बन्दों, बेडा डुबोने में  अपना अपना योगदान देते रहो|  बेस्ट ऑफ लक|